Monday, September 14, 2015

आन्दोलनलाई सम्बोधन गर्न भारतको औपचारिक आग्रह

भारतीय विदेश मन्त्री सुष्मा स्वराज

नेपालको राजनितीमा प्रभावशाली मानिने दक्षिणी छिमेकी भारतले नेपालको विभिन्न भागमा चलीरहेको आन्द्योलन प्रति आफुहरुको गम्भिर चासो भएको भन्दै त्यसलाई यथासक्दो चाडो सम्बोधन गर्न नेपालको प्रमुख दलहरु संग आग्रह गरेको छ । भारतीय विदेश मन्त्री सुष्मा स्वराजले गए राती एक वक्त्व्य जारी गर्दै भनेका छन, हम सभी राजनीतिक पक्षों से लचीला रुख अपनाने की अपील करते हैं ताकि शेष मुद्दों का समाधान यथासंभव अधिकतम समझौते से तथा हिंसामुक्त परिवेश में किया जा सके। नेपाल के अलग –अलग भागों तथा समाज के सभी वर्गों को पूरी तरह स्वीकार्य तथा उनकी आकांक्षाओं का ध्यान रखने वाला संविधान शांतिपूर्ण व संपन्न नेपाल की सुदृढ़ आधारशिला रख सकेगा तथा नेपाल के उज्ज्वल भविष्य का केंद्रबिंदु बनेगा।

उनले मधेशमा एक महिना देखि जारी आन्दोलनलाई नाम लिएर किटान नगरे पनि विज्ञिप्तमा हालै मधेशमा भईरहेको आन्द्योलनको क्रममा देखिएको हिंसाप्रति आफुहरुको गम्भिर ध्यानाकर्षण भएको र यसले हामीलाई गम्भिर बनाई दिएको पनि उल्लेख गरेका छन । हालै संविद्यान निर्माणको प्रक्रिया अघि वढेको लाई साकारातम्क भए पनि भारतले आन्द्योलनरत पक्षहरुलाई समेटेर सवै पक्षको स्विकार्यतामा जोड दिएको छ ।

पढनुस भारतीय विदेश मन्त्रीको वक्त्वयको पुरा अंश

भारत के विदेश मंत्री द्वारा दिया गया वक्तव्य

भारत ने सर्वदा शांति, स्थिरता, एकता तथा नेपाल के विकास का समर्थन किया है। गत दो दशकों के दौरान हम नेपाल में हिंसा, अस्थिरता, आंतरिक संघर्ष तथा राजनीतिक कलह और इसके नकारात्मक परिणामों के गवाह रहे हैं। नेपाल इस संकट से उबरा भी नहीं था कि अप्रैल,  में एक भयानक भूकंप ने देश में बर्बादी तथा महाविनाश की स्थिति उत्पन्न कर दी।

संकट चाहे राजनीतिक हो या प्राकृतिक, भारत सरकार ने हमेशा नेपाल की समृद्धि तथा कल्याण की कामना की है और वह किसी भी प्रतिकूल स्थिति में नेपाल की सहायता को अपना परम कर्तव्य मानती है।

विगत कुछ महीनों के दौरान नेपाल का राजनीतिक नेतृत्व आपसी परामर्श व संवाद के जरिए संविधान का प्रारूप तैयार करने के अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य में लगा हुआ है।

दूर बैठे सभी नेताओं की ओर से यह उत्साहवर्धक आवाज़ सुनाई देती थी कि संविधान सभी क्षेत्रों और वर्गों को साथ लेकर तथा नेपाल के उज्ज्वल भविष्य का केंद्र बिन्दु बनकर एक प्रगतिशील, आधुनिक और संघठित नेपाल का निर्माण करेगा । सभी राजनीतिक नेताओं का यह स्वर भारत में सभी को सबसे अधिक प्रसन्नता देता है।

नेपाल के राजनीतिक नेतृत्व ने गत वर्षों के दौरान इन चुनौतियों का सामना करने में बुद्धिमत्ता व परिपक्वता का प्रदर्शन किया है जिसके परिणामस्वरूप शांति प्रक्रिया प्रारंभ करने तथा दो सफल चुनावों के जरिए समावेशी बहुदलीय संवैधानिक लोकतंत्र को ठोस बनाने में काफी सफलता मिली है। शांति प्रक्रिया में नेपाल की उप्लब्धियों की हम सराहना करते हैं।

हम संविधान के अनुमोदन की ओर संविधान सभा द्वारा हाल ही में की गई प्रगति का स्वागत व प्रशंसा करते हैं, क्योंकि इस प्रक्रिया के जरिए कई विवादास्पद मुद्दों का समाधान कर लिया गया है।

भारत नेपाल के कई भागों में चल रहे विरोध आंदोलनों तथा संघर्ष से चिंतित हैं। भयंकर हिंसा ने फिर एक बार नेपाल की आत्मा को झकझोर दिया हैं। मरने वाले चाहे वे नेपाली नागरिक हो या सरकारी मुलाज़िम, सभी घटनाओं में जो खून बहा है वह नेपाल का ही खून था। भूकंप की गहन त्रासदी से अभी उबरना बाकी है। ऐसे में यह गंभीर स्थिति संसार में किसी भी मानवतावादी देश को चोट पहुंचाती है ।

इस परिप्रेक्ष्य में हम सभी राजनीतिक पक्षों से लचीला रुख अपनाने की अपील करते हैं ताकि शेष मुद्दों का समाधान यथासंभव अधिकतम समझौते से तथा हिंसामुक्त परिवेश में किया जा सके। नेपाल के अलग –अलग भागों तथा समाज के सभी वर्गों को पूरी तरह स्वीकार्य तथा उनकी आकांक्षाओं का ध्यान रखने वाला संविधान शांतिपूर्ण व संपन्न नेपाल की सुदृढ़ आधारशिला रख सकेगा तथा नेपाल के उज्ज्वल भविष्य का केंद्र(बिंदु बनेगा।

नेपाल के राजनीतिक दल, संगठन तथा बुद्धिजीवी वर्ग ने संकट के समय हमेशा परिपक्वता तथा दूरदर्शिता का प्रदर्शन किया है। उनके सतत नेतृत्व तथा बुद्धिमत्ता के कारण ही नेपाल वर्तमान कठिनाइयों पर विजय प्राप्त कर सका है। आधुनिक नेपाल के निर्माण के लिए स्थायी एवं मज़बूत संविधान आवश्यक है और हम आशा करते हैं कि नेपाली नेतृत्व इस संबंध में कोई कोर(कसर नहीं छोड़ेगा।

भारत सरकार नेपाल की सरकार तथा वहां के लोगों के साथ उत्साहपूर्ण व हार्दिक संबंधों को और सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और वह नेपाल के लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप शांति, स्थिरता तथा सामाजिक(आर्थिक विकास हेतु सभी प्रकार की सहायता प्रदान करती रहेगी।

1 comment:

  1. तुम पहले काश्मीरके जनताको उनके चाहनाके संबिधान दे दो , फिर हमें से बातें करना । काश्मिर से भारतीय सेनाको वापस लावों । पहले अपने गिरवान पर झाँककर देखो । आप लोगों ने काश्मिरी जनतापर कितने अत्याचार कर रहे हों । हमे आपका Advice का जरुरत नहीं है ।

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